जैव उर्वरक व कीटनाशी के प्रयोग से ही उत्पादन मे बढ़ोत्तरी

जौनपुर खुटहन भारत सरकार द्वारा संचालित जैवप्रौद्योगिकी परियोजनान्तर्गत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी मे चल रहे शोध कार्य मे सम्लित छात्र गोवर्धन कुमार चौहान, दुर्गेश जयसवाल आनंद कुमार गौरव की मौजूदगी मे सोमवार को धमौर खास, सौरइया और घुघुरी सुल्तानपुर गावों मे कृषि गोष्ठी आयोजित कर रासायनिक खादो से हानि और जैविक खाद से लाभ के बिषय मे बताया गया।

शोधार्थी छात्रो ने जैविक खाद बनाने के तरीको को समझाते हुए कहा कि एक किग्रा जैविक खाद बनाने मे मात्र 5 से सात रूपये की लागत आती है। उनका दावा है कि खेत मे इसके प्रयोग से जहाँ उत्पादन मे 25 से 30 प्रतिशत बढ़ोत्तरी होती है। वही मिट्टी की मृदा शक्ति मे भी बृद्धि हो जाती है। खाद के प्रयोग से पैदा होने वाला अन्न स्वास्थ्य वर्धक होता है। इसे खाने मे उपभोग करने से अल्सर, कैंसर, हार्ट अटैक, लकवा, नपुंसकता और हड्डी रोग जैसी बीमारियों से बचाव होता है। इस मौके पर गोपीचंद प्रधान, नंदलाल, भीषम वर्मा, दिनेश, हीरालाल, राधेश्याम, सुधाकर, लाल बहादुर आदि किसान मौजूद रहे।

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