अनिल दुबे आजाद : बदले परिवेश में पत्रकार अपना धर्म कब तक,क्यों और किसलिए निभाये ?

 बदले परिवेश में पत्रकार अपना धर्म कब तक,क्यों और किसलिए निभाये ? अनिल दुबे आजाद,
बदलते परिवेश में भी पत्रकारिता करते काफी वर्ष बीत गए लेकिन आमजन में पत्रकारिता के प्रति बदलता नजरिया काफी चिंतित करने वाला है। पत्रकारिता का धर्म ईमानदारी से निभाने वाले पत्रकारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता आया है। जिसको लेकर कई प्रदेशों में पत्रकारों ने आवाज उठाई जिसका नतीजा सुखद अनुभव वाला रहा और उन राज्यो में पत्रकारों की तरफ आंख उठा कर देखने वालों को भी सीधा मुकदमा दर्ज करने का फरमान है। लेकिन राजस्थान में भी पत्रकारों के प्रति आमजन की बदलती सोच ने एक बार फिर से पत्रकारिता जगत में सोचने को मजबूर कर दिया है।
आमजन के लिए संघर्ष करने वाला मीडिया कहा जाता है कि किसी के पहचान पत्र,राशनकार्ड बनने से लेकर सरकारी कोई भी सुविधा ना मिलने तक हर खबर पर आमजन की आवाज बनते आया है। हर रोज मीडिया का पहला पेज आमजन के हित से जुड़े मुद्दों पर सीधा सरकार व महकमें से लड़ता आया है। लेकिन समाज को शायद इन्ही मीडिया को खत्म करने की इतनी जल्दी है कि मानो उनकी गाड़ी छूट रही हो! चिंता होना लाजमी है अब कब तक मीडिया किसी की आवाज बिना किसी सुरक्षा के बनते रहेगा!

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