मन की बात अनिल दुबे आजाद के साथ: कांग्रेस पार्टी नहीं एक विचारधारा है इसे सजाने और संयोजित करने की महती आवश्यकता”

कांग्रेस पार्टी नहीं एक विचारधारा है इसे सजाने और संयोजित करने की महती आवश्यकता” उद्गार मन की बात अनिल दुबे आजाद” के साथ कार्यक्रम में मन की बात करते हुए पंडित अनिल दुबे आजाद ने कहा कि वास्तव में गोडसे वादी कांग्रेस पार्टी को तो वक्ती तौर पर हराने में सफल हो सकते हैं लेकिन कांग्रेसी विचारधारा को पराजित करना उनके बस की बात नहीं हम अपील करना चाहेंगे कांग्रेस के दिलों की धड़कन देश के जनक पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचारों पर चलते हुए उनके पद चिन्हों का अनुसरण करते हुए कांग्रेस पार्टी हर दिल अजीज राहुल गांधी जी उस विचारधारा की महकती खुशबू प्रियंका गांधी जी के साथ साथ करोड़ों करोड़ इस विचारधारा से लैस चाहे वह कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी हो अथवा विचारक अथवा नेता या कि शुभचिंतक किसी को विचलित होने की कोई आवश्यकता नहीं है और ना ही किसी पदाधिकारी को अपने पद से इस्तीफा देने की आवश्यकता ही है वास्तव में आवश्यकता तो इस बात की है की सबसे पहले जनता के दिलों में उतरना होगा और ऐसा करने के लिए सम्मानित पुराने समस्त वरिष्ठ पदाधिकारियों जिनकी उम्र 60 वर्ष से ऊपर है उन्हें संरक्षक की भूमिका में सम्मानित रूप से अपनी राय देने के लिए भारी-भरकम कमेटी बनाई जाए दूसरी बात समस्त जनपदों के समस्त राज्य कमेटियों के अध्यक्षों को पद रेवड़ी की तरह ना बांटा जाए और मक्खन पालिश करने वाले लोगों को पदों की जिम्मेदारियां बिल्कुल न दी जाएं बल्कि उनका कार्यक्रम तय कराया जाए उनकी अहमियत उनकी औकात को समझने का प्रयास किया जाए सदस्यता अभियान में वास्तविक सदस्य बनाकर उन्हीं सदस्यों के बीच से पदाधिकारी तय किए जाएं हां इन्हें प्रभारियों के रूप में जिम्मेदारी अवश्य दी जाए उसके बाद उनका आकलन करके पूर्ण सोच विचार से ही बाद में उन्हें पदों की जिम्मेदारियां दी जाए उसमें इस बात का निश्चित ध्यान रखा जाए कि भारत विभिन्न धर्म और संप्रदाय का देश है सब की हिस्सेदारी कमेटियों में बराबर से रखी जाए और सहयोगी प्रकोष्ठ निश्चित तौर पर राष्ट्रीय स्तर से लेकर के ग्राम सभा स्तर तक प्रकोष्ठ के अध्यक्षों की तैनाती हर हाल में की जाए इसके साथ साथ कार्यक्रम और उसकी जिम्मेदारियां नियमित रूप से निर्वहन की जाएं अंत में सबसे बड़ा मुद्दा कांग्रेस पार्टी के टिकट को लेकर भ्रम जाल फैला हुआ है लोग कहते हैं प्रत्याशियों को बड़े पैमाने पर धन दिया जाता है इस पर निश्चित तौर पर रोक लगाई जाए चुनाव प्रचार के लिए जो संभव हो उसे पार्टी करें हमारा आशय यह रोकने का नहीं है लेकिन पदाधिकारी स्थानीय लोगों को ही पार्टी का प्रत्याशी बनाए जाने की जवाबदारी सुनिश्चित की जाए बाहरी लोगों यानी कि आयातित लोगों को किसी भी सूरत में टिकट न दिया जाए यहां तक की पदाधिकारियों का चयन करते ही यह जवाबदेही तय कर दी जाए कि 5 वर्ष तक जनता की सेवा करने वाला नेता ही टिकट पाएगा ऐसा पहले से सुनिश्चित किया जाए छोटे दलों से कुछ सीख अवश्य ली जाए लोकसभा स्तर पर अथवा विधानसभा स्तर पर कुछ प्रभारी और सह प्रभारियों की नियुक्तियां की जाएं कमेटियों के रूप में और उन्हें यह अधिकार भी दिया जाए वह खुले मंच से यह तय कर सकें कि अमुक व्यक्ति ही चुनाव लड़कर चुनाव जीत सकता है ताकि उस पर हाई पावर कमेटी निर्णय ले और उसी को टिकट दिया जाए निश्चित तौर पर अगर पहले से कमजोर से कमजोर व्यक्ति को यह बता दिया जाए आने वाले चुनाव में अमुक व्यक्ति को ही चुनाव लड़ना है तो निश्चित तौर पर धन का दुरुपयोग नहीं होगा न हीं चुनाव आयोग के आदेशों का उल्लंघन करना पड़ेगा उस 5 वर्ष में वही व्यक्ति जिसे चुनाव लड़ना है वही इतना कैडर तैयार करके उसके बूते पर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों के मार्गदर्शन पर निश्चित ही चुनाव जीतने में सफल होगा ऐसा हमारा मानना है जो शत प्रतिशत सत्य अवश्यंभावी है साल के 365 को दिन निश्चित तौर पर केंद्रीय कमेटियां नजर बनाए रखें नियमित रूप से कार्यक्रम आयोजित किए जाएं और पूर्ण भरोसे के साथ अपने नेतृत्व में भरोसा पैदा किया जाए क्योंकि लोहे से ही लोहा काटा जाता है इसलिए इस तरह से रास्ते पर चलकर निश्चित कांग्रेसी विचारधारा विजई होगी उसका असर आने वाले विधानसभा के चुनाव में ही तमाम राज्यों में दिखाई पड़ने लगेगा

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