पानी की कमी से मरने वाले तैयार रहे,वाशिंग प्लाटों पर लगे रोक, तालाबों की हो साफ-सफाई नहीं

प्रयागराज  :रिवेन्दर सिंह:शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत फिलहाल पानी की समस्या को देखते हुए जब तक पानी नहीं गिर रहा है तब तक शंकरगढ़ क्षेत्र के वाशिंग प्लांटो को प्रशासनिक अधिकारियों को बंद करवाने की जरूरत है क्योंकि धन पशु लोग धरती की कोख का बेलिहाज खनन कर उसकी ताकत को कम करने की कोशिश दशकों से चल रही हैं। नदियों के प्राकृतिक बहाव को रोक कर अपने मुनाफे और सहूलियत के लिए उनकी दिशाओं को मोडऩे का गुनाह करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं हम। दुस्साहस देखिये कि धरती का दामन छोटा होता महसूस हुआ तो इन्सानी अंहकार ने आसमानों में बस्तियां बनाने की योजनायें शुरू कर दीं। जमीनें उजाड़ दी, पर्वतों के सीने चीरकर अपने लिए ऐशगाहों के निर्माण कर लिये, जंगल उजाड़ दिये,पहले वृक्ष काटकर गगनचुम्बी इमारतों की नींव रखी,बाद में ‘प्लांटेशन के लिये मैराथन दौड़ कर, रिकार्ड बनाकर, अपनी पिक्स फेसबुक पर अपलोड करके फूले नहीं समा रहे हैं। चिडिय़ों को उड़ा दिया, गायों को कूड़ा-कचरा खाने को विवश किया। दरअसल प्रकृति विरोधी कथित विकास हमें विनाश की ओर ले जा रहा है। एक अरसा पहले ही पहाड़ पर प्रलय को सबने देखा। उसके बाद जमीन की जीनत कश्मीर जलजले में डूब गया। फिर बे-मौसम बरसात और ओलावृष्टि ने धरती पुत्रों के मुकद्दर में मौत का मातम लिख दिया। गर किसी को संकेतों में बात समझ आती है तो इसका मतलब यह है कि पहाड़ों और पेड़ों को काटने, नदियों को बांधने और जंगलों को मिटाने का मतलब विकास नहीं है, यह खुद को मिटाने की भौतिक तैयारी है।कुदरत ने कायनात को बेहिसाब नियामतों से नवाजा है। हजारों जीव-जन्तुओं, पादपों, इन्सानों को जिन्दगी बख्शने के लिए सदानीरा नदियां प्रदान की तो पहाड़ों के उतुंग शिखरों को बना कर मौसम के मिजाज को अनुशासित किया, दरख्तों ने जहां पूरी कायनात को सांसे बख्शी वहीं धरती की कोख ने इन्सान की जिन्दगी को आसान बनाने के लिए अपने खजाने खोल दिये। लेकिन लोभ और हवस के घोड़े पर बैठा बदहवास इन्सान, कुदरत की बख्शी अनमोल नियामतों, जो कि आने वाली नस्लों के लिए अमानत होती हैं, में खयानत करने से बाज नहीं आ रहा है।और धरती के सीने को छलनी कर अपने फायदे के लिए खनन कर दो सौ पाच सौ हजार फिट का बोरिंग कर जल स्तर को और नीचे ले जा रहे हैं जब जल स्तर को स्थिर करने का एक ही माध्यम है जो अर्से से तालाब भटे हुए हैं उन्हें हमें साफ सफाई कर सही रुप देने की आवश्यकता है नहीं वो दिन दूर नहीं जब घर घर बोरिंग होगी, और धरती में पानी नहीं होगा, जिसके पहले बेजुबान जानवर पशु पक्षियों की पानी के कमी से मौत होगी फिर मनुष्य के भी जीवन में संकट पैदा होने लगेगा। अभी समय है पेड़ पौधों को सुरक्षित रख तालाबों पर सरकार ध्यान दे।

डीआरएस न्यूज नेटवर्क

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