गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री गुरू वाघेला ने शिष्य रंगा की असलियत बताई आप समझ सके तो समझें

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री गुरू वाघेला ने शिष्य रंगा की असलियत बताई आप समझ सके तो समझें
भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने भी खुल कर कह दिया है कि गोधरा की तरह पुलवामा कांड भी रगां ने ही कराया है।। हम तो यह बात बहुत पहले ही कह दी थी। वस्तुतः शंकर सिंह वाघेला ही रंगा के राजनीतिक गुरु हैं, और किसी भी व्यक्ति को उसकी सबसे ज्यादा पहचान उसके गुरु को ही होती है। रंगा को दुनिया में सबसे ज्यादा शंकर सिंह वाघेला ही जानते हैं उनसे ज्यादा उनको कोई नहीं जानता है।
शंकर सिंह वाघेला ने अपने चेले रंगा की असलियत को बयान कर दिया है। गोधरा ट्रेन में जिन 69 हिंदुओं को जलाया गया था वो रंगा जी की साजिश थी, क्यों कि रंगा जी तत्कालीन मुख्यमंत्री केशु भाई पटेल को हटा कर मुख्यमंत्री बने थे, जिस कारण गुजरात का पूरा पटेल समुदाय तथा भाजपा नेता नाराज थे और आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा का हारना तैय था, ऐसे में रंगा और बिल्ला ने षड्यंत्र रचा कि इस समस्या से निपटने का एक ही रास्ता है और वो रास्ता है हिंदु वोटों का ध्रुवीकरण किया जाए और किसी तरह अपने आपको हिंदु सम्राट घोषित किया जाए।
सन् 2002 में कहीं कोई हिंदु बनाम मुस्लिम का माहौल नहीं था लेकिन अचानक गोधरा में एक ट्रेन जलती है जिसमें लगभग 69 हिंदु जलाए जाते हैं, पूरे देश के हिंदुओं में जबरदस्त आक्रोश होता है इस ट्रेन को जलाने का आरोप मुस्लिमों पर लगाया जाता है, फिर रंगा के इशारे पर अहमदाबाद में मुस्लिमों पर कट्टरपंथी भाजपाई हिंदुओं द्वारा हमला होता है। लगभग 3000 मुस्लिमों की हत्या होती है। जिसमें बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग होते हैं। कुछ आई पी एस अधिकारी रंगा के इस षड्यंत्र की खिलाफत करते हैं उन्हें नौकरी से निकाला जाता है। एक अधिकारी संजीव भट्ट को तो एक झूठे आरोप में जेल भेजा गया है जिसकी जमानत नहीं होने दी जा रही है।।
रंगा के गोधरा षड्यंत्र की खबर तत्कालीन गृहमंत्री हरेन पंड्या को होती है। वो विरोध दर्ज कराते हैं और रंगा को 69 निरीह हिंदुओं तथा 3000 निरीह मुस्लिमों की हत्या का जिम्मेदार ठहरा कर, रंगा के षड्यंत्र को सार्वजनिक करने की बात करते हैं तो अचानक मॉर्निंग वॉक पर गुजरात के गृहमंत्री हरेन पंड्या की हत्या हो जाती है, हरेन पंड्या की पत्नी और मां पंड्या की हत्या का आरोप रंगा पर लगाते हैं ।
क़ातिल पकड़े नहीं जाते हैं। वस्तुतः कत्ल की सुपारी सोहराबुद्दीन शेख जो कि उदयपुर का हिस्ट्रीशीटर था को दी गई थी। सोहराबुद्दीन शेख इस मामले में संबधित लोगों से मोटी रकम वसूल करता है, लेकिन रंगा गैंग को डर होता है कि कहीं सोहराबुद्दीन असलियत बयान ना कर दे या पंड्या की हत्या के आरोप में गिरफ्तार ना हो जाए, इस डर से सोहराबुद्दीन शेख़ का एनकाऊंटर कराया जाता है। लेकिन इस षड्यंत्र की जानकारी सोहराबुद्दीन के दोस्त तुलसी प्रजापति और सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी के पास होती है तो फिर तुलसी प्रजापति का एनकाऊंटर होता है और कौसर बी को जला कर मार दिया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट को सबकुछ गड़बड़ लगती है तो वो सोहराबुद्दीन मामले की ट्रायल महाराष्ट्र शिफ्ट कर देते हैं वहां सुनवाई कर रहे जस्टिस लोया को मैनेज करने का प्रयास किया जाता है, उसे हाईकोर्ट के जज शाह द्वारा 100 करोड़ का ऑफर दिया जाता है जिसे वो ठुकरा देता है क्योंकि लोया ईमानदार थे साथ इस ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी थी। जस्टिस लोया पंद्रह बीस दिन बाद निर्णय सुनाने जा रहे थे कि उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यू होती है और वे दो वकील जिनसे लोया की बहुत नजदीकी थी, उन दोनों वकीलों की संदिग्ध अवस्था में मृत्यु होती है।
जस्टिस लोया की जगह जो जज आता है वो पंद्रह दिन में ही पांच हजार फाइल की चार्ज शीट के बावजूद रंगा और बिल्ला को क्लीन चिट दे देता है।
यह सारी हकीकत गोधरा कांड की है। अब पुलवामा कांड में भी ऐसा ही हुआ था।
Intelligence Alert के बावजूद पुलवामा में 42 सैनिकों की शहादत कैसे और किसकी लापरवाही से हुई ?
RDX कैसे पंहुचा ?
इस पर आज तक कोई जांच कमीशन क्यों नहीं बना ?
चुनाव में छद्म राष्ट्रवाद की हवा बनाने के लिए हमारे देश के महान सैनिकों की शहादत को टूल बनाकर राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए कहीं रंगा-बिल्ला का षड्यंत्र तो नहीं !! क्यों कि इनके पास चुनावों में कोई मुद्दा नहीं था, विकास के नाम रंगा सरकार पूरी तरह से विफल रही है, किसान, युवा रोजगार, विकास सहित सभी मुद्दों पर विफलता के बाद छद्म राष्ट्रवाद और हिंदुत्व एक मात्र विकल्प बचा था जिसके लिए पुलवामा कांड भी एक षड्यंत्र का हिस्सा हो सकता है।।
शंकर सिंह वाघेला ने इन सबकी पुष्टि कर दी है।

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